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सफेद दागो के लिए DRDO द्वारा विकसित दवा

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के तहत कार्यरत रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की इकाई – रक्षा जैव उर्जा अनुसंधान संस्थान (डीआईबीईआर) ने सामाजिक लज्जाजनक मानी जाने वाली बीमारी ल्युकोडर्मा (सफेद दाग) से लड़ने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। DRDO ने दुलर्भ किस्म की जड़ी-बूटियों के अद्भुत चिकित्सा गुणों के आधार पर इस बीमारी का इलाज ढूंढ निकाला है। DRDO के वैज्ञानिकों ने कई वर्षो की मेहनत के बाद इस बीमारी की कारगर औशधि विकसित की है। इन वैज्ञानिकों ने आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से इस औशधि की प्रभावषीलता एवं सुरक्षा को भी साबित किया है।

सफेद दाग के व्यापक उपचार के लिये पोशण की कमी, प्रतिरक्षा स्थिति, शरीर की अंतः स्रावी कार्य प्रणाली, आहार संबंधी दिशा निर्देशों, जीवन शैली संबंधी कारकों और कुछ हिदायतों का पालन किया जाना चाहिये, ताकि मरीज को उपचार का अधिक से अधिक लाभ मिले और मरीज तेजी से स्वास्थ्य लाभ उठायें।

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एमिल हेल्थकेयर एंड रिसर्च सेंटर के चिकित्सकों की एक टीम ने आज घोषणा की कि इस औशधी के लाभों से सफेद दाग के मरीजों को लाभान्वित करने के उद्देष्य से एक मेडिकल कैम्प लगाया जायेगा। यह कैम्प लखनऊ के चार बाग में होटल विश्वानाथ में आयोजित किया जायेगा। इसके अलावा डाक्टरों की टीम देश के विभिन्न भागों में भी कैम्प आयोजित करेगी।

एमिल हेल्थकेयर एंड रिसर्च सेंटर के पास 20 हजार से अधिक पंजीकृत मरीज हैं। ये मरीज देश के विभिन्न भागों से हैं तथा अनेक मरीज विदेशो से भी हैं। एमिल हेल्थकेयर एंड रिसर्च सेंटर की वर्श 2012 में स्थापना होने के बाद से करीब 14 हजार मरीजों का पूरा ईलाज हो चुका है और वे इलाज से पूर्णत सन्तुष्ट हैं जबकि बाकी के मरीज ईलाज के विभिन्न चरण में हैं।

एमिल हेल्थ केयर एंड रिसर्च सेंटर के चिकित्सा निदेषक ने कहा कि चिकित्सकों की टीम ने सफेद दाग के उपचार को अत्यंत प्रभावकारी पाया है और यह टीम सफेद दाग पर विजय पाने तथा मरीजों के चेहरे पर खुशी तथा संतोष लाने के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

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